Q3 FY26 में TCS के कर्मचारियों की संख्या में बड़ी गिरावट, 11,151 लोगों की कटौती से बढ़ी IT सेक्टर की चिंता
भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक बार फिर सुर्खियों में है। वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या में 11,151 की कमी दर्ज की गई है। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब TCS के वर्कफोर्स में गिरावट देखने को मिली है।
यह बदलाव केवल एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय आईटी सेक्टर में चल रहे संरचनात्मक बदलाव, लागत नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
Q3 FY26 में TCS का हेडकाउंट: क्या आंकड़े कहते हैं
Q3 FY26 के अंत में TCS का कुल हेडकाउंट घटकर 5,82,163 रह गया। इससे पहले सितंबर तिमाही के अंत में यह संख्या 5,93,314 थी। यानी केवल एक तिमाही में 11,151 कर्मचारियों की कमी।
इससे पहले Q2 FY26 में भी TCS ने लगभग 19,755 कर्मचारियों की कटौती की थी। दो तिमाहियों में कुल मिलाकर कर्मचारियों की संख्या में 30,000 से अधिक की गिरावट यह संकेत देती है कि कंपनी का यह फैसला अस्थायी नहीं बल्कि रणनीतिक है।
पहले बढ़ोतरी, फिर अचानक गिरावट
FY26 की शुरुआत TCS के लिए बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही थी।
Q1 FY26 में कंपनी ने 13,090 नए कर्मचारियों को जोड़ा था और कुल वर्कफोर्स बढ़कर 6,13,069 तक पहुंच गई थी, जो उस समय का उच्चतम स्तर था।
हालांकि, इसके बाद सितंबर और दिसंबर तिमाही में आई तेज गिरावट यह दिखाती है कि कंपनी ने अपनी वर्कफोर्स रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
वर्कफोर्स में कटौती के पीछे कारण
1. टेक्नोलॉजी और डिलीवरी मॉडल में बदलाव
आईटी इंडस्ट्री अब पहले जैसी नहीं रही।
जहां पहले बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती थी, अब:
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ऑटोमेशन
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AI आधारित टूल्स
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क्लाउड प्लेटफॉर्म
के जरिए कम लोगों में अधिक काम हो रहा है। इससे कंपनियों को लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने का मौका मिल रहा है।
2. नियोजित छंटनी और पुनर्गठन
TCS ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब 2% हिस्सा घटाने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य संगठन को भविष्य की जरूरतों के अनुसार ढालना बताया गया था।
हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि यह कटौती केवल योजनाबद्ध छंटनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें प्राकृतिक attrition और रोल रेशनलाइजेशन भी शामिल है।
3. Attrition अब भी ऊंचा
Q3 FY26 में आईटी सेवाओं में स्वैच्छिक attrition लगभग 13.5% के आसपास रहा।
हालांकि यह महामारी के बाद देखे गए उच्चतम स्तर से कम है, लेकिन अब भी यह संकेत देता है कि कर्मचारी नई संभावनाओं की तलाश में कंपनियां छोड़ रहे हैं।
4. AI और स्किल-बेस्ड अप्रोच
TCS का साफ फोकस अब AI-first मॉडल पर है।
कंपनी ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही है जिनके पास:
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एडवांस AI स्किल्स
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डेटा एनालिटिक्स
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क्लाउड और डिजिटल क्षमताएं
हैं।
पुराने या कम प्रासंगिक स्किल्स वाले रोल्स धीरे-धीरे कम किए जा रहे हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का असर
Q3 FY26 में TCS का वित्तीय प्रदर्शन मिला-जुला रहा।
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नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर लगभग 14% गिरकर ₹10,657 करोड़ रह गया
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वहीं राजस्व में करीब 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹67,087 करोड़ तक पहुंचा
ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 25% के आसपास स्थिर रहा, जो दर्शाता है कि कंपनी लागत पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रही है।
AI और नए सौदों पर फोकस
TCS के लिए राहत की बात यह रही कि:
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तिमाही के दौरान नए डील्स का कुल मूल्य $9.3 बिलियन रहा
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AI से जुड़ा वार्षिक राजस्व बढ़कर लगभग $1.8 बिलियन तक पहुंच गया
यह दिखाता है कि कंपनी का भविष्य का दांव पारंपरिक आईटी सेवाओं से हटकर AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर है।
नए टैलेंट पर निवेश, लेकिन सीमित संख्या में
जहां कुल हेडकाउंट घट रहा है, वहीं TCS ने बताया कि उसने:
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हाई-स्किल्ड फ्रेशर्स की भर्ती बढ़ाई है
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खासतौर पर AI और डिजिटल स्किल्स वाले युवाओं पर फोकस किया है
यानी कंपनी कम संख्या में, लेकिन ज्यादा कुशल टैलेंट पर निवेश कर रही है।
आईटी सेक्टर के लिए क्या संकेत?
TCS की स्थिति यह दिखाती है कि:
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आईटी कंपनियां अब सतर्क हैं
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हायरिंग पूरी तरह डिमांड पर निर्भर हो गई है
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केवल स्किल्ड और मल्टी-टेक्नोलॉजी प्रोफाइल्स की मांग रहेगी
यह ट्रेंड आने वाले समय में पूरे सेक्टर को प्रभावित कर सकता है।
कर्मचारियों और जॉब सीकर्स के लिए सीख
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Upskilling अब अनिवार्य है – AI, डेटा और क्लाउड सीखना जरूरी
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एक स्किल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है
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फ्लेक्सिबिलिटी और लर्निंग माइंडसेट भविष्य में सबसे बड़ा हथियार होगा
Q3 FY26 में TCS के हेडकाउंट में 11,151 की गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह संकेत है कि भारतीय आईटी इंडस्ट्री नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां संख्या से ज्यादा कौशल, दक्षता और तकनीकी समझ मायने रखेगी।
आने वाली तिमाहियों में हायरिंग की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि AI आधारित सेवाएं कितनी तेजी से नए राजस्व अवसर पैदा करती हैं।

